रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है। 40 वर्ष के बाद धीरे-धीरे लंबाई कम होने लगती है और 70 वर्ष के बाद यह कमी तेज हो सकती है। इसका एक कारण गलत बैठने-उठने का तरीका और असंतुलित जीवनशैली है। इसलिए समय रहते रीढ़ की देखभाल करना जरूरी है।
रीढ़ की हड्डी की बनावट को समझें
रीढ़ की हड्डी सीधी रेखा में नहीं होती, बल्कि इसमें हल्के प्राकृतिक मोड़ होते हैं। अगर इसे साइड से देखें तो इसका आकार अंग्रेजी के “S” अक्षर जैसा दिखाई देता है। इन सामान्य वक्रों को लोर्डोसिस और काइफोसिस कहा जाता है। ये कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि शरीर के संतुलन और लचीलेपन के लिए आवश्यक संरचना हैं। सही पोस्चर बनाए रखने से इन वक्रों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।
उम्र बढ़ने पर होने वाली आम समस्याएं*र्रा के कामों का भार लंबे समय तक सहन करती रहती है। समय के साथ इसमें घिसाव और कमजोरी आ सकती है। कई लोगों को निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है—
- हड्डियों का घनत्व कम होना
- कमर और पीठ में कड़ापन
- चलने, बैठने, उठने या झुकने में कठिनाई
- लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने पर दर्द
- भारी सामान उठाने में परेशानी
- शरीर का लचीलापन कम होना
- ठंड के मौसम में दर्द और अकड़न बढ़ना
ये लक्षण जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
रीढ़ से जुड़ी प्रमुख बीमारियां
उम्र बढ़ने पर कुछ विशेष रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जैसे—
- ऑस्टियोपोरोसिस
- डिस्क डीजनरेशन
- स्पाइन ऑस्टियोआर्थराइटिस
- स्पाइनल स्टेनोसिस
इन स्थितियों में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, डिस्क घिसने लगती हैं या नसों पर दबाव पड़ सकता है। समय पर पहचान और इलाज जरूरी है।
उपचार के विकल्प
रीढ़ की समस्याओं के लिए कई प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं। शुरुआत में दवाइयां, फिजियोथेरेपी और इंजेक्शन से राहत मिल सकती है। यदि स्थिति गंभीर हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। आजकल कम चीरे वाली तकनीकों से सर्जरी की जाती है, जिससे मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। सही उपचार का चुनाव विशेषज्ञ द्वारा जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।
रीढ़ को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
- बैठते और खड़े होते समय सही पोस्चर रखें।
- संतुलित आहार लें जिसमें कैल्शियम और विटामिन डी शामिल हों।
- नियमित हल्का व्यायाम करें, जैसे वॉक या स्ट्रेचिंग।
- शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
- धूम्रपान से दूर रहें, क्योंकि यह रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है।
- ऐसे गद्दे और तकिए का उपयोग करें जो रीढ़ को सही सहारा दें।
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें।
छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी समस्याओं से बचा सकती हैं।
निष्कर्ष
बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन सही जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर लक्षणों को पहचानना और उचित उपचार लेना जरूरी है। स्वस्थ रीढ़ बेहतर गतिशीलता और आत्मनिर्भर जीवन का आधार है।
किसी भी बड़े आहार, जीवनशैली या दवा से जुड़े परिवर्तन से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
वे आपकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर सकते हैं।
नोट – यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी चिंता है, तो कृपया हमें +91-9058577992 पर संपर्क करें और हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श प्राप्त करें। धन्यवाद।
