शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाने पर कुछ लोगों को जोड़ों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। कुछ मामलों में यूरिक एसिड के कण जोड़ों में जमा होकर गाउट की समस्या पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक यूरिक एसिड ज्यादा रहने पर किडनी से जुड़ी परेशानी का खतरा भी बढ़ सकता है।
आयुर्वेद में शरीर को संतुलित रखने के लिए कई जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, इनके असर को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण हर जड़ी-बूटी के लिए एक जैसे नहीं हैं। इसलिए इन्हें इलाज का पूरा विकल्प नहीं मानना चाहिए। गाउट या बहुत ज्यादा यूरिक एसिड होने पर सही जांच और स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
यूरिक एसिड क्या होता है?
यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक पदार्थ है। यह कुछ खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्यूरीन को शरीर द्वारा तोड़ने के बाद बनता है। आम तौर पर किडनी इसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। जब शरीर में इसका स्तर बढ़ जाता है या इसे बाहर निकालने में परेशानी होती है, तो यह जोड़ों में छोटे-छोटे कण बना सकता है।
इससे खासकर पैर के अंगूठे या दूसरे जोड़ों में अचानक तेज दर्द, लालपन और सूजन हो सकती है।
यूरिक एसिड के लिए आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली 7 चीजें
1. त्रिफला
त्रिफला तीन फलों से बनी आयुर्वेदिक औषधि है—आंवला, हरड़ और बहेड़ा। इसे आम तौर पर पाचन और शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यूरिक एसिड कम करने के लिए त्रिफला को पक्का इलाज मानने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
2. गिलोय
गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता है। इसे शरीर में सूजन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन बढ़े हुए यूरिक एसिड या गाउट को ठीक करने में इसका असर अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है।
3. गुग्गुल
गुग्गुल आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली एक प्राकृतिक चीज है। इसे कई तरह की समस्याओं में उपयोग किया जाता है। लेकिन यूरिक एसिड कम करने के लिए इसे खुद से लेना सही नहीं है। खासकर अगर पहले से कोई दवा चल रही हो, तो पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।
4. पुनर्नवा
पुनर्नवा का इस्तेमाल आयुर्वेद में पेशाब से जुड़ी समस्याओं और शरीर में पानी के संतुलन के लिए किया जाता है। इसे यूरिक एसिड के लिए भी उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके असर को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा का इस्तेमाल आम तौर पर तनाव, थकान और सामान्य स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह सीधे यूरिक एसिड कम करने की सिद्ध दवा नहीं है। इसलिए केवल अश्वगंधा पर निर्भर रहकर यूरिक एसिड का इलाज नहीं करना चाहिए।
6. हल्दी
हल्दी में करक्यूमिन नाम का पदार्थ पाया जाता है। इसमें सूजन कम करने वाले गुण हो सकते हैं, लेकिन यूरिक एसिड या गाउट के इलाज के लिए हल्दी की गोलियों या ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट लेने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। भोजन में सामान्य मात्रा में हल्दी का इस्तेमाल अलग बात है।
7. त्रिकटु
त्रिकटु में सोंठ, काली मिर्च और पीपली जैसी चीजें शामिल होती हैं। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल पाचन से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता है। लेकिन इसे यूरिक एसिड कम करने की पक्की दवा नहीं माना जा सकता।
खान-पान और रोज की आदतों पर भी ध्यान दें
केवल जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहने के बजाय खान-पान और जीवनशैली पर भी ध्यान देना जरूरी है। पानी पर्याप्त मात्रा में पीना, वजन स्वस्थ सीमा में रखना और बहुत ज्यादा मीठे पेय तथा प्यूरीन से भरपूर कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना मददगार हो सकता है। गाउट में शराब, खासकर बीयर, मीठे पेय, अंगों के मांस और कुछ अन्य अधिक प्यूरीन वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह दी जाती है।
जड़ी-बूटियां लेते समय सावधानी रखें
प्राकृतिक होने का मतलब हमेशा पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है। कुछ जड़ी-बूटियां दूसरी दवाओं के साथ असर डाल सकती हैं या कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में नुकसान कर सकती हैं। इसलिए किसी भी हर्बल दवा या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों का दर्द और सूजन रोजमर्रा की जिंदगी को काफी मुश्किल बना सकते हैं। त्रिफला, गिलोय, गुग्गुल, पुनर्नवा, अश्वगंधा, हल्दी और त्रिकटु जैसी आयुर्वेदिक चीजों का पारंपरिक रूप से अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन्हें यूरिक एसिड या गाउट का पक्का इलाज मानना सही नहीं है। सही खान-पान, स्वस्थ वजन, पर्याप्त पानी और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सा सलाह साथ-साथ जरूरी हैं। यदि यूरिक एसिड लगातार बढ़ा हुआ है या बार-बार जोड़ों में तेज दर्द और सूजन होती है, तो जांच कराकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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