ऑस्टियोआर्थराइटिस दुनिया में सबसे आम जोड़ों की समस्याओं में से एक है। यह मुख्य रूप से घुटनों, कूल्हों, हाथों और रीढ़ जैसे जोड़ों को प्रभावित करता है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनियाभर में ऑस्टियोआर्थराइटिस से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग 1 अरब तक पहुंच सकती है। यह अनुमान बढ़ती उम्र, जनसंख्या में वृद्धि और मोटापे जैसे प्रमुख कारणों से जुड़ा है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस के बढ़ते मामले
इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) से जुड़े ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन में 1990 से 2020 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस से प्रभावित लोगों की संख्या 1990 में लगभग 25.6 करोड़ थी, जो 2020 में बढ़कर करीब 59.5 करोड़ हो गई। यानी तीन दशकों में मामलों में काफी वृद्धि हुई है।
आने वाले वर्षों में बुजुर्ग आबादी बढ़ने के साथ इस समस्या का बोझ भी बढ़ सकता है। हालांकि, उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली और समय पर देखभाल से जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस क्यों होता है?
ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद उपास्थि धीरे-धीरे कमजोर और क्षतिग्रस्त हो सकती है। इससे दर्द, अकड़न, सूजन और जोड़ को हिलाने में परेशानी हो सकती है। उम्र के अलावा पुराने जोड़ों के घाव, शरीर का अधिक वजन, जोड़ों की बनावट या असंतुलन और लंबे समय तक जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव भी जोखिम बढ़ा सकता है।
कुछ लोगों के काम या रोजमर्रा की गतिविधियों में घुटनों और अन्य जोड़ों पर बार-बार दबाव पड़ता है। ऐसे मामलों में सही शारीरिक तकनीक, पर्याप्त आराम और आवश्यकता के अनुसार गतिविधियों में बदलाव उपयोगी हो सकते हैं।
महिलाओं में अधिक मामले
अध्ययन के 2020 के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत और पुरुषों की 39 प्रतिशत थी। महिलाओं में अधिक जोखिम के पीछे हार्मोनल, आनुवंशिक और शारीरिक कारणों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, यह समस्या किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
मोटापा एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक
अधिक वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, खासकर घुटनों और कूल्हों पर। अध्ययन में बताया गया है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस से जुड़ी विकलांगता में मोटापे का योगदान 1990 के लगभग 16 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में करीब 20 प्रतिशत हो गया।
स्वस्थ वजन बनाए रखना इसलिए जोड़ों की देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। वजन कम करने की आवश्यकता होने पर इसे धीरे-धीरे और स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना अधिक उचित है।
बचाव के लिए क्या करें?
नियमित हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि, जैसे पैदल चलना, तैरना या जोड़ों के अनुकूल व्यायाम, मांसपेशियों को मजबूत रखने और शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। अचानक बहुत अधिक व्यायाम करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ाना बेहतर रहता है।
संतुलित आहार भी सामान्य हड्डी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। विटामिन D, प्रोटीन, कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं। किसी विशेष पोषक तत्व या सप्लीमेंट की आवश्यकता हो तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
समय पर जांच और देखभाल जरूरी
ऑस्टियोआर्थराइटिस का कोई स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और दैनिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई उपचार विकल्प मौजूद हैं। दर्द, लगातार अकड़न या जोड़ की गतिविधि में कमी होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी है। उपचार व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में भी जोड़ों से जुड़ी समस्याओं के लिए विभिन्न दवाएं और देखभाल के तरीके उपलब्ध हैं। इनका उपयोग जिम्मेदारी से और योग्य चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ करना उचित है, विशेष रूप से यदि व्यक्ति पहले से कोई अन्य दवा ले रहा हो।
स्वस्थ वजन, नियमित गतिविधि, संतुलित भोजन और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसे कदम ऑस्टियोआर्थराइटिस के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद कर सकते हैं। व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार सही सलाह के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना सबसे उचित तरीका है।
हाशमी दवाखाना के बारे में
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