जोड़ों का दर्द ऐसी समस्या है, जिसे आमतौर पर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, अब कम उम्र के लोग भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। 25 से 50 वर्ष की आयु के कई लोगों में घुटनों, हाथों, कलाई, कंधों और अन्य जोड़ों में दर्द की शिकायत बढ़ती दिखाई दे रही है। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान और बढ़ता वजन इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 35 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में भी हर महीने जोड़ों के दर्द के लगभग चार से पाँच नए मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, पिछले कुछ महीनों में 25 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में लगभग 30 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक बताई गई है।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कम उम्र में जोड़ों का दर्द क्यों होता है और इससे राहत पाने के लिए कौन-से उपाय अपनाए जा सकते हैं।
युवाओं में जोड़ों का दर्द बढ़ने के प्रमुख कारण
जोड़ों में दर्द केवल उम्र बढ़ने के कारण नहीं होता। इसके पीछे कई शारीरिक, चिकित्सकीय और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं।
1. ऑस्टियोआर्थराइटिस
ऑस्टियोआर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जोड़ों के बीच मौजूद सुरक्षा प्रदान करने वाली उपास्थि धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसके कारण हड्डियों के बीच घर्षण बढ़ सकता है और दर्द, अकड़न तथा चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। पुराने जोड़ों के चोटिल होने और अधिक दबाव पड़ने से भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
2. रूमेटॉइड आर्थराइटिस
यह एक प्रतिरक्षा तंत्र से संबंधित बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों के ऊतकों पर हमला करने लगती है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न हो सकती है। यह समस्या अक्सर हाथों की उंगलियों और कलाई को प्रभावित करती है। समय पर उपचार न मिलने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है।
3. गाउट या गठिया
गाउट में शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने और उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा होने के कारण अचानक तेज दर्द और सूजन हो सकती है। यह समस्या अक्सर पैर के अंगूठे से शुरू होती है, लेकिन शरीर के अन्य जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है।
4. बर्साइटिस और टेंडिनाइटिस
जोड़ों के आसपास मौजूद तरल पदार्थ से भरी छोटी थैलियों में सूजन होने को बर्साइटिस कहते हैं। वहीं, मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले टेंडन में सूजन होने पर टेंडिनाइटिस की समस्या हो सकती है। बार-बार एक जैसी गतिविधियाँ करने, अत्यधिक व्यायाम या जोड़ों पर दबाव पड़ने से ये समस्याएँ विकसित हो सकती हैं।
5. पुरानी चोट और विटामिन की कमी
पहले लगी हड्डियों की चोट, मोच या फ्रैक्चर के कारण भविष्य में जोड़ों में दर्द बना रह सकता है। इसके अलावा विटामिन D3 और विटामिन B12 की कमी भी मांसपेशियों तथा हड्डियों से जुड़ी परेशानियों में योगदान दे सकती है। हालांकि, केवल दर्द के आधार पर विटामिन की कमी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
6. मोटापा और मानसिक तनाव
शरीर का वजन अधिक होने से घुटनों और कूल्हों जैसे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके अलावा चिंता, अवसाद और लगातार मानसिक तनाव भी शरीर में दर्द की अनुभूति को बढ़ा सकते हैं।
जोड़ों के दर्द से राहत पाने के प्रभावी उपाय
जोड़ों को स्वस्थ रखने और दर्द को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है।
1. नियमित हल्का व्यायाम करें
टहलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसे कम दबाव वाले व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत बनाने तथा जोड़ों का लचीलापन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। व्यायाम अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें।
2. संतुलित और पौष्टिक भोजन लें
अपने आहार में हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दालें, दूध और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। अत्यधिक तले हुए, मीठे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
3. गर्म और ठंडी सिकाई करें
गर्म सिकाई से मांसपेशियों की अकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, ठंडी सिकाई दर्द और सूजन में अस्थायी राहत दे सकती है। दोनों का इस्तेमाल उचित सावधानी के साथ करें।
4. वजन नियंत्रित रखें
स्वस्थ वजन बनाए रखने से विशेष रूप से घुटनों और कूल्हों पर पड़ने वाला दबाव कम करने में मदद मिलती है। इसके लिए संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएँ।
5. विटामिन और मिनरल की जाँच करवाएँ
यदि जोड़ों में लगातार दर्द रहता है, तो डॉक्टर की सलाह से विटामिन D3, विटामिन B12 और अन्य आवश्यक जाँच करवाई जा सकती हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
6. हल्की मालिश और पर्याप्त आराम लें
हल्की मालिश से आसपास की मांसपेशियों का तनाव कम हो सकता है। पर्याप्त नींद लें और दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों से कुछ समय के लिए बचें। अधिक सूजन या चोट की स्थिति में मालिश करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, गर्माहट या सुबह उठने पर लंबे समय तक अकड़न बनी रहती है, तो चिकित्सकीय जाँच करवाएँ। अचानक तेज दर्द, जोड़ों में अत्यधिक सूजन, बुखार या चलने में असमर्थता होने पर जल्द चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष
युवाओं में जोड़ों का दर्द बढ़ना एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिस पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, गाउट, पुरानी चोट, विटामिन की कमी, मोटापा और मानसिक तनाव इसके संभावित कारण हो सकते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और उचित देखभाल से जोड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लगातार दर्द होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य डॉक्टर से जाँच और सलाह अवश्य लें।
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